Sunday, June 24, 2018

कांग्रेस से कितनी सफल है मोदी सरकार

मोदी सरकार के चार साल का कार्यकाल पूरा होने को आया है। ऐसे मे एनडीए और यूपीए सरकार की तुलना होना लाजमी है। आज के परिदृश्य में अधिकांश मानते हैं कि कांग्रेस एक बेहतर विकल्प है। अगर यूपीए और एनडीए सरकार के बीच अर्थव्यवस्था की तुलना करे तो मोदी सरकार का प्रदर्शन इतना खास नहीं रहा है। बडी संख्या मे लोग मोदी से खुश, लेकिन उनकी लोकप्रियता कहीं ना कहीं कम हो रही है। विकास व अर्थवयव्सथा किसी भी देश की रीढ की हडडी होती है यह जितनी मजबूत होगी दुनिया मे उस देश की शक्ति को उसी के अनुसाार आंका जाएगा लेकिन मोदी सरकार कि विकास कह रफतार मनमोहन सरकार से कुछ धीमी है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह स्वंय अर्थशास्त्री हैं। ऐसे मे देश की अर्थव्यवस्था उनकी सरकार मे मजबूत रही। मंहगाई पर भी लगााम लगी रही। डीजल व पैट्रौेल केे दामों मे मनमोहन सरकार मे काफी कमी आयो वंही मोदी सरकार में इनके दाम रोजाना बढ रहें हैं जिससे आम जनता को हताशा हुई है रिपोर्ट की माने तो, करीब 70 प्रतिशत लोगों का कहना है कि पिछले तीन साल में सरकार ने उसी रफ्तार से काम किया है, जिसकी उम्मीद थी।

अगर अर्थव्यवस्था के विकास संबंधी आंकड़ों कों देखें तो मोदी सरकार का अब तक का प्रदर्शन यूपीए सरकार से उतना बेहतर भी नहीं कहा जा सकता है। गौरतलब है कि पूर्व यूपीए सरकार के आखिरी साल की विकास दर 6.9 फीसदी थी। वहीं, दूसरी ओर देश में अच्छे दिन लाने का दावा करने वाली बीजेपी सरकार के पिछले तीन सालों में देश की औसत विकास दर 7.36 फीसदी रही है । नए आधार वर्ष के अनुसार जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक यूपीए सरकार के आखिरी तीन सालों की औसत औद्योगिक विकास दर 3.4 प्रतिशत रही। अगर अलग-अलग सालों के लिए इस आंकड़े को देखें तो 2011-12 से 2013-14 के बीच के तीन सालों में औद्योगिक विकास दर 3.5, 3.3 और 3.4 फीसदी रही।

नरेंद्र मोदी के पिछले तीन सालों में औद्योगिक विकास का औसत 4.1 प्रतिशत रहा। नरेंद्र मोदी के बीते तीन सालों में औद्योगिक विकास दर 4.0, 3.4 और 5.0 फीसदी रही।

इसे दो तरह से देखा जा सकता है एक तो यह कि मोदी के तमाम प्रयासों और दावों के बावजूद उनके कार्यकाल में उद्योगों की विकास दर यूपीए सरकार से केवल 0.7 फीसदी ज्यादा ही रही है। दूसरा अगर कोई सरकार आती है तो तुरंत ही चमत्कारी बदलाव नहीं आते । इस लिहाज से वर्ष 2016-17 की विकास दर का पांच फीसदी होना इस सरकार के बारे में सकारात्मक राय बनाता है, लेकिन फिर यह भी कहा जा सकता है कि वर्ष 2014-15 में जो विकास दर चार फीसदी रही उसमें भी एक बड़ा योगदान पिछले साल, पिछली सरकार द्वारा किये गये कामों का हो सकता है।

रोजगार की दशा और दिशा पर केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय का श्रम ब्यूरो हर तिमाही में सर्वे कर आंकडे जारी करता है।पिछली कई तिमाहियों में यह बताते हैं कि मोदी सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद देश में रोजगार सृजन लगातार कम हो रहा है। श्रम ब्यूरो के ताजा सर्वे के अनुसार वर्ष 2015 और 2016 में 1.55 और 2.13 लाख नए रोजगार सृजित हुए जो पिछले आठ का सबसे निचला स्तर है। मनमोहन सिंह काल के आखिरी सबसे खराब दो सालों यानी 2012 और 2013 में कुल 7.41 लाख नए रोजगार सृजित हुए पर मोदी राज के दो सालों 2015 और 16 में कुल 3.86 लाख रोजगार सृजित हुए हैं. यानी 2.55 लाख रोजगार कम यूपीए-2 के शुरू के दो साल यानी 2009 और 2010 में 10.06 और 8.65 लाख नए रोजगार सृजित हुए थे।यदि इसकी तुलना 2015 और 2016 से की जाए तो मोदी राज के इन दो सालों में तकरीबन 74 फीसदी रोजगार के अवसर कम हो गए हैं।श्रम मंत्रालय का श्रम ब्यूरो ने यह तिमाही सर्वे 2008-09 के वैश्विक संकट के बाद रोजगार पर पड़े प्रभाव के आकलन के लिए 2009 से शुरू किया था।

देश में शौचालयों का निर्माण कराने के मामले में मोदी सरकार की तुलना में पिछली यूपीए सरकार का रिकार्ड काफी अच्छा था इसका खुलासा पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की तरफ से पेश की गई एक रिपोर्ट से हुआ है।पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के मुताबिक नवंबर 2014 और अक्टूबर 2015 के बीच 98 लाख से ज्यादा शौचालयों का निर्माण कराया गया है पिछले तीन सालों के आकड़ों की तुलना में ये संख्या भले ही दोगुनी हो, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार से ज्यादा यूपीए की सरकार ने ही शौचालयों का निर्माण कराया था। इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2004 से 2009 के बीच यूपीए की पहली सरकार में 4.6 करोड़ शौचालय बनाए गए थे। इस हिसाब से हर साल औसतन 92 लाख शौचालयों का निर्माण हुआ। वहीं यूपीए की दूसरी सरकार ने 2009 से 2014 के बीच हर साल औसतन 86 लाख की दर से 4.3 करोड़ शौचालय बनवाए थे। मोदी सरकार के कार्यकाल में 78 लाख शौचालय औसतन हर साल बनवाए गए हैं, जबकि यूपीए के कार्यकाल में 92 लाख शौचालयों का निर्माण हुआ था।

2 अक्टूबर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की थी। इस मिशन का मकसद साल 2019 तक भारत के उन घरों में शौचालय उपलब्ध कराना है जहां इसकी सुविधा नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी कहहते हैं कि कांग्रेस को जनता ने 60 साल दिये उन्हें केवल 60 माह विकास के लिए दें लेकिन मोदी शायद ये भूल जातें है कि कांग्रेस के हाथ मे देश की बागडोर उस समय आयी थी जब देश आजाद हुआ था और देश की अर्थवयवस्था चरमराई हुई थी और आज देश विश्व शक्ति के पायदान पर ख्रडा है। यह उपलबिध देश को कांग्रेस के शासन काल मे ही मिली है अब देखना यह है कि मोदी के नेत्रत्व में देश किस पायदान पर पंहुचता है।

-By: Alisha Sharma

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