Sunday, June 24, 2018

फसल बीमा योजना बनी किसानों के लिए सिरदर्द

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 जनवरी, 2016 को देश के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का एक बड़ा तोहफा दिया था। दावा किया जा रहा है की किसान इसका ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। सरकार के मुताबिक प्रीमियम से अधिक राशि के दावों का भुगतान किसानों को दिया गया है। पहले बीमा योजना में मुश्किल से पांच प्रतिशत किसान शामिल होते थे लेकीन आज इसके तहत 23 प्रतिशत किसान आते हैं, जो काफी उत्साहजनक है। इस योजना की आवंटन राशि को भी बढ़ाया गया है। 2015-16 में इसके लिए 3000 करोड़ रुपये आवंटित थे, जिसे 2017-18 में बढ़ाकर 9000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही इस योजना में फसल क्षेत्र के दायरे का लक्ष्य 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया रखा गया है।

बीमा का फायदा नहीं-

लेकिन इस योजना की जमीन हकीकत कुछ और ही है। किसानों का कहना है की बैंक खाते से फसल बीमा राशि काटते है लेेकिन आजतक बीमा की क्लेम राशि नहीं दी गई।

किसानों को राहत देने के लिए शुरू की गई पीएम फसल बीमा योजना किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित होने लगी है। फसल बीमा कराने वाले किसानों से बीमा कंपनी जो राशि वसूली रही है भुगतान करते वक्त उससे भी कम राशि दी जा रही है। प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने वाले किसान कंगाल होते जा रहे हैं और बीमा कंपनी साल-दर-साल मालामाल होते जा रही है।

यही नहीं फसल बीमा करते समय बैंक को ये तक नहीं पता कि किसान ने फसल कौन-सी लगाई है। करीब 6 ए·ड में खेती करने किसान हरीश ने बताया कि हमने फसल बाजरे की लगाई लेकिन बैंक ने बीमा धान का कर दिया। किसान क्रष्ण चंद्र देशवाल ने 4 ए·ड धान अगस्त में खराब होने पर बीमा ·ंपनी में क्लेम किया लेकीन आज तक सर्वे भर नहीं हुआ ।

सवाल यह पैदा होता है कि बीमा आग्रह की वस्तु है यानी किसान की सहमति के बिना बीमा करके उसके खाते से प्रीमियम का पैसा जबरन कैसे कटा जा सकता है? दूसरा बैंक बीमा उस फसल का करे जो किसान ने बोई है ना की उसका जो उसने बोई ही नहीं और तीसरा किसान को फसल खराब होने पर बीमे का पैसा तो मिले वरना इस फसल बीमा योजना का फायदा क्या हुआ?

क्या है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना-

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बेहद कम प्रीमियम पर किसानों की फसल का बीमा किया जाता है ताकि किसान इसकी किस्तें आसानी से वहन कर सके। यह योजना ना सिर्फ खरीफ और रबी की फसलों को बलकि वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए भी सुरक्षा प्रदान करती है।

खरीफ की फसल के लिए 2 प्रतिशत प्रीमियम और रबी की फसल के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है। जबकि वार्षिक वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए पांच प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करना होता है।

कम प्रीमियम पर अधिकतम बीमा देने वाली इस योजना की खासियत है कि इस योजना में सभी खाद्य फसलें, तिलहन, वार्षि· व्यावसायिक या साग सब्जी का बीमा होता है। पहले की योजनाओं में कुछ फसलें और तिलहन का ही बीमा होता था।

पहले किसानों को 50 फीसदी फसल नष्ट होने पर मुआवजा मिलता था। लेकीन अब महज 33 फीसदी फसल नष्ट होने पर ही फसल का बीमा मिलता है।

ओला, जलभराव और लैण्ड स्लाइड जैसी आपदाओं को स्थानीय आपदा मानकर केवल प्रभावित किसानों का सर्वे कर उन्हें दावा राशि प्रदान की जाएगी।

यही नहीं इस योजना में पोस्ट हार्वेस्ट नुकसान भी शामिल किया गया है जिसमें फसल कटने के 14 दिन तक यदि फसल खेत में है और उस दौरान कोई आपदा आ जाती है तो किसानों को दावा राशि प्राप्त हो सकेगी।

By: Alisha Sharma

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