Monday, December 17, 2018
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क्यों लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ चाहती है बीजेपी और बचता आया है विपक्ष

2104 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। वह इसे लोकतंत्र के लिहाज से एक अच्छा विकल्प मान रहे हैं। इससे सरकार का समय और खर्च दोनों ही बचेंगे साथ ही जनता भी एक समय मे दो सरकारों को चुनने में सक्षम रहेगी। हाल में ही एक टीवी पत्रकार को साक्षात्कार देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बात कही थी।

यह बीजेपी की लोकप्रियता को देखते हुए दिया गया बयान भी हो सकता है लेकिन इसके फायदे हैं, सरकार इससे भी इंकार नहीं कर सकती है। हालांकि इसमें कई बाधाएं हैं और सबसे बड़ा रोड़ा है विपक्ष का, जो अब तक इस विधि का समर्थन करने से बचती आई है।

लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का निर्णय जनता और सरकार दोनों के लिए अच्छा विकल्प है लेकिन इसे कारगर कर पाना मुश्किल प्रतीत हो रही है। उसका कारण यह है कि बीजेपी 19 राज्यों में अपनी सत्ता जमाए हुए है। एक बार फिर से विपक्ष में वापसी करना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और अन्य क्षेत्रीय दलों वाली सरकारें इसके खिलाफ आवाज उठा सकती हैं। ऐसे में यह फैसला खटाई में पड़ता दिख रहा है।

आज विपक्ष का ये हाल हैं कि वो सत्ताधीश पार्टी बीजेपी के कहीं से भी बराबर नहीं है। न तो राज्यों में और न ही केंद्र में विपक्ष के लिए कोई जगह बची है। अब वह इस बात से भी डर रहा है कि बीजेपी ने 19 राज्यों में अपनी सरकार बना ही लिया है कहीं आगे भी राज्यों की सत्ता हासिल करने में सक्षम न हो जाए। साथ ही लोकसभा में 2014 जैसा प्रदर्शन दोहराने में बीजेपी सफल हो गई तो विपक्ष के लिए पांच साल तक राजनीति का हर दरवाज़ा बंद हो जाएगा। इससे विपक्ष शायद ही वापसी करने में सफलता पा सके। खैर ये सभी महज अभी खबरें हैं। इस प्रक्रिया को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। हालांकि कयाश पूरे लगाए जा रहे हैं कि मोदी सरकार इसको लेकर जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकती है।

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