Sunday, June 24, 2018

मौत की कीमत लाश का धर्म देखकर लगाते हैं, वो दिल्ली को मुगलिया अंदाज़ में चलाते हैं

दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाके के एक ख्याला में अंकित नाम के एक शख्स की हत्या कर दी जाती है। यह हत्या प्यार-मोहब्बत की वजह से की गई है। प्रेम प्रसंग में गला रेत कर किये गये हत्याकांड के मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अब सवालों के घेरे में हैं। सोशल मीडिया पर लोग केजरीवाल को लगातार निशाने पर ले रहे हैं। यह सवाल इसलिए उठना लाजमी भी है क्योंकि यह वही केजरीवाल हैं जो अपने राज्य से बाहर यूपी के नोएडा के एक गाँव में नंगे पांव पहुंचे थे। जब अख़लाक की लाश पर राजनीति की रोटियां सेंकनी थी लेकिन आज जब दिल्ली में उनकी ही नाक के नीचे अंकित सक्सेना की हत्या हुई तब झूठी संवेदना तक व्यक्त करने का समय नहीं था उनके पास, यह क्या है?

यह वही केजरीवाल हैं जो धर्म की राजनीति करने से मना करते आये हैं। यह वही हैं जो अख़लाक और जुनैद से लेकर पहलू तक बोलते नजर आएं है लेकिन न उन्हें डॉ नारंग न चंदन की मौत पर बोलने की फुरसत थी न आज अंकित की मौत पर बोलने की, क्योंकि यह हत्या अल्पसंख्यक वर्ग के लड़के की नहीं थी। वह तो आरोपी थे और मरने वाला बहुसंख्यक वर्ग से थे मतलब राजनीति के लिए यह लाभदायक नहीं था। अब सवाल है यह कौन सा सेक्यूलर रुख है?

अखबार से लेकर टीवी और सोशल मीडिया में भी हर जगह यही चर्चा है कि राजनीति के लिहाज से अगर धर्म अहम है और सभी दल इसके आदि हो चुके हैं। बीजेपी पर एक खास वर्ग के समर्थन और विरोध का आरोप लगता है लेकिन उसके किसी एक कार्यकर्ता ने या नेता ने कभी ऐसी हत्या का कम से कम मौन समर्थन तो नहीं किया? वहीं दूसरी पार्टियों के लोग वोटबैंक के चक्कर में इतने गिर गए कि लाशों की राजनीति ही इनकी आदत बन गई है। इसे बदलना है तो आप बदलिए, समाज बदलिए और सोचिए, आप किसके समर्थक हैं और क्यों? क्या ऐसा सेक्युलर होना सही है जो धर्म देखकर हत्या जैसे गंभीर अपराध का समर्थन और विरोध करता है?

इस मामले पर आप के पूर्व मंत्री और विधायक कपिल मिश्रा और कुमार विश्वास ने ट्वीट कर सवाल उठाया है। कुमार ने अपने ट्वीट में लिखा है, कभी हिन्दू, कभी मुस्लिम बना कर कत्ल करते हैं, पता करिए कि हत्यारों पर किसकी मेहरबानी है? हो रोहित वेमुला, अखलाक, चंदन या कि अंकित हो, हमारे हुक्मरानों की जलालत की कहानी है। इसके अलावा कपिल ने ट्वीट में लिखा, अब मेरा दिल न कोई मजहब न मसीहा मांगे, ये तो बस प्यार से जीने का सलीका मांगे, ऐसी फसलों को उगाने की जरूरत क्या है? जो पनपने के लिए खून का दरिया मांगे।

कपिल ने केजरीवाल पर दोहरे रवैये के लिए हमला बोलते हुए कहा कि, अगर अंकित का नाम अखलाक हुआ होता, मेरे शहर का मालिक कल सारी रात न सोता, मौत की कीमत लाश का धर्म देखकर लगाते हैं, वो दिल्ली को मुगलिया अंदाज़ में चलाते हैं। कपिल और कुमार के अलावा भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लोगों में गुस्से का गुबार है। हालांकि इसके बावजूद केजरीवाल चुप हैं। अब देखना है उनका क्या स्टैंड होता है।

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