Sunday, December 16, 2018
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‘अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन’

साल का यही वो महीना है जहाँ पर पिछले दो वर्षों से हम ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ का हनन होते देखते आ रहे है। पहले 2016 में ‘जेएनयू‘ विवाद और 2017 में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित ‘रामजस कॉलेज’ में छीड़ा विवाद।

कही-न-कही ये दोनों ही वाक्यो ने देश को झकझोर कर रख दिया और वो भी कुछ यूं की ‘अपने ही देश मे रहकर,इसके टुकड़े और कश्मीर की आज़ादी की बात चंद मुट्ठीभर लोग बड़ी बदहवासी से करने लगे’।

JNU riots

और पूरी दुनिया के सामने भारत को शर्मसार होना पड़ा। अपने आप को बुद्धिजीवी कहने वाले ये छात्र, कोर्ट द्वारा अफ़ज़ल गुरु,यासीन मलिक जैसे अपराधियो पर लागए हुए आरोपो को बेबुनियाद और निराधार बतलाने लगे।

और जब पूरे देश ने इनकी घोर निंदा की तो इसे ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी का हनन‘ होना करार दे दिया।

ये कितना सही या कितना गलत है, इसका निर्णय हम आप पाठको पर छोड़ते है।

ये बात भी गौर करने लायक है और एक बहुत बड़ा सवाल हम सब के सामने इससे उभर कर ये आता है की ‘क्या हम एक लोकतांत्रिक देश होने का नाजायज़ फायदा तो नही उठा रहै’?

Ramdas College Riots

माना कि इस देश मे छोटा हो या बड़ा,किसी भी जाति,धर्म या लिंग का क्यों न हो,उसे हमारा संविधान अपने विचार प्रकट करने का पूरा हक देती है। लेकिन इसको अपना कंधा बनाकर कही हम कुछ ऐसी चीज़ों को व्यक्त तो नही कर रहे या बढ़ावा तो नही दे रहे जिसकी आव्यशकता हमारे समाज मे शून्य हो?

आखिर क्या मिला इन्हें देशविरोधी गतिविधियां कर,बस चंद दिनों की शौहरत?

और आज कहां धूल खाते फिर रहे है, किसी को अंदाज़ा तक तो क्या, कुछ अता-पता भी नही।

समाज मे अगर हम बदलाव चाहते है,चाहते है अगर भारत आगे बढ़े तो केवल बातो से कुछ नही होगा।

‘ज़मीन पर आकर,धरातल पर आकर काम करने से बदलाव आएगा।’ जिस भारत की शायद से हमारे तथाकथित ये ‘बुद्धिजीवी’ और खुद को ‘देशभक्त’ बतलाने वाले ये लोग, कामना कर रहे है। वो तो शायद दूर-दूर तक पूरा होता नही दिखता है।

आई ये देश में बदलाव का नारा देते है,

इसे तोड़ने का नही,

देश को जोड़ने की बात करते है,

विभाजित करने का नही

देश को एक ‘Global Power‘ बनाने की बात करते है, ना ही कि ‘Human Development Index‘ में और नीचे खीचने की।

जब ऐसी प्रगतिशील सोच का आयात-निर्यात हमारे समाज मे होगा, तब शायद हमारा देश ‘विकास की गगन-चुम्बी इमारत‘ खड़ा करने में सफल हो सकेगा।

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