Wednesday, August 22, 2018

‘मोदी की परीक्षा, 2019’

हर-हर मोदी! घर-घर मोदी! लगता है कि बस अब कुछ ही दिन और रह गए है,भारतीय जनता पार्टी द्वारा भारतीय इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज़ कराने से। जब पूरा भारतवर्ष भगवा रंग से सराबोर हो जाएगा और भारत के हर एक राज्य और केंद्र शाषित राज्यों (union territory) में हमे इनका परचम लहराता हुआ दिखेगा।

आखिर क्या हुआ ऐसा 16 मई 2014 को की लगभग सभी बैलट बक्सों में से नरेंद्र मोदी को सबसे ज़्यादा मत मिले?

क्या लोगो ने खुद को मोदी में देखा,या फिर देश के लिए उन्हें प्रबल प्रबंधक माना? वजह चाहे जो भी हो,महत्वपूर्ण बात ये है कि अगले साल होने वाले आम चुनावों के लिए, मोदी अभी भी सबसे लोकप्रिय नेता के तौर पर शीर्ष पर काबिज है,और दूर-दूर तक उन्हें कोई प्रतियोगिता देते नही दिखता।जो कि कही न कही दर्शाता है कि बीते चार वर्षों में उनकी सरकार द्वारा किये गए काम को लोगो ने पसंद किया है और इस देश की बागडोर की कमान उनके हाथों दुबारा सौंपने के लिए तैयार है।

चाहे विमुद्रिकरण हो, स्मार्ट सिटी, रेल मंत्रालय की सेवाएं, स्वच्छ भारत अभियान, कौशल विकास योजना, जन-धन योजना, तीन तलाख पर सुनवाई आदि जैसे स्कीम्स और मुहिम,मुद्दों को लोगो ने कही न कही सराहना की। यहीं नही कूटनीतिक छेत्र में भी चाहे वो पाकिस्तान को ‘सर्जिकल स्ट्राइक‘ से मुंहतोड़ जवाब देना हो या फिर अपने विदेशी दौरों के माध्यम से विदेशी निवेश और बेहतर सम्बन्ध बनाने की कवायदे हो।

उसी के फलस्वरूप 19 राज्यो में आज भाजपा की सरकार काबिज़ है और तो और बहुत सारे केंद्र और राज्य शाषित विश्विद्यालयों में भी इनकी छात्र टुकड़ियां काबिज़ हुई है।

जिस प्रकार से आज भी इमरजेंसी के जे.पी. आंदोलन को याद किया जाता है,निश्चित ही आगे आने वाले पीढियां ‘मोदी सरकार’ के वर्चस्व के बारे में पढ़ेंगी और उन्हें एक कुशल सेवक के रूप में याद करेंगी।

बहरहाल,ये तो रही सकरात्मकता की दृष्टिकोण से देखने की बात अगर हम ‘क्रिटिकल एनालिसिस‘ (Critical Analysis) करे तो इस सरकार ने बहुत सारी कवायदे और लोगो से वायदे भी किये जिसे पूरा करने में वो न चाहते हुए भी विफल रही। चाहे हर एक भारतीय के बैंक खाते में 15 लाख की बात को जुमला करार करना हो या फिर हर साल एक करोड़ रोज़गार निकालना हो इसमें मोदी सरकार अभी तक फेल होती नज़र आई है।

सबसे ज़्यादा इनकी आलोचना जो हुई वो थी ‘अभिव्यकित की आज़ादी का हनन‘ और देश मे अराजकता फैलाने को लेकर, जिससे की कुछ खास वर्ग के लोग खासा आहत हुए और शायद से ये इनके सरकार के लिए नकारात्मक ज़रूर जाए।

तो अगर अन्दाज़तन हम कहे तो 2019 की आम चुनावों में शायद से भारतीय जनता पार्टी द्वारा नेतृत्व नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स को कुछ सीटों का घाटा भी हो सकता है और बढ़ोतरी भी,कहना मुश्किल है।लेकिन इनकी जीत की गति पर रोक लगता अभी दिख नही रहा है।

अंतत: ‘ये पब्लिक है, किसी को भी राजा और किसी को भी रंक बना सकती है। क्योंकि इन्हें जो भाया वो सबसे अच्छा अन्यथा सबसे बेकार’।

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